उत्तर प्रदेशलखनऊ

वीआईपी हजरतगंज में कानून की धज्जियां: सीएम दफ्तर के पास अवैध हुक्का बार का ‘खेल’

लखनऊ का 'मेराज लॉन्ज' बना विवादों का केंद्र, पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल; सफेदपोश रसूख या पुलिस की मिलीभगत? सिविल अस्पताल के पास खुलेआम परोसा जा रहा हुक्का

अजीत मिश्रा (खोजी)

वीआईपी ज़ोन में कानून को ठेंगा: सीएम आवास के पास ‘मेराज लॉन्ज’ में चल रहा अवैध हुक्का बार

  • सीएम कार्यालय से महज 700 मीटर दूर चल रहा अवैध हुक्का बार, स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश
  • हजरतगंज: नियमों को ताक पर रखकर संचालित ‘मेराज लॉन्ज’ पर कार्रवाई की मांग
  • प्रशासन की नाक के नीचे अवैध गतिविधि: हजरतगंज में देर रात तक चल रहा हुक्का बार
  • वीआईपी इलाके में सुरक्षित नहीं आम नागरिक: ‘मेराज लॉन्ज’ की मनमानी से क्षेत्रवासी परेशान
  • कानून के रखवालों की ‘रहस्यमयी चुप्पी’, क्या हजरतगंज पुलिस को नहीं दिख रहा अवैध हुक्का बार?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का हजरतगंज क्षेत्र, जो अपनी हाई-सिक्योरिटी और वीआईपी मूवमेंट के लिए जाना जाता है, वहां कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सिविल अस्पताल के ठीक सामने स्थित ‘मेराज लॉन्ज’ (Miraj Lounge) पर देर रात तक अवैध रूप से हुक्का बार संचालित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह प्रतिष्ठान मुख्यमंत्री कार्यालय से महज 700 मीटर की दूरी पर स्थित है, फिर भी प्रशासन की नाक के नीचे यह खेल बेखौफ जारी है।

​स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश

​इस लॉन्ज में होने वाली देर रात की गतिविधियों से स्थानीय नागरिक और वहां के निवासी खासे परेशान हैं। उनका कहना है कि हुक्का बार के संचालन के कारण इलाके का माहौल दूषित हो रहा है। रात भर तेज संगीत और युवाओं की भीड़ से स्थानीय परिवारों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों का घरों से बाहर निकलना दुश्वार हो गया है। नागरिकों का कहना है कि उच्च न्यायालय के कड़े आदेशों और प्रशासनिक नियमों का यहां कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।

​हजरतगंज पुलिस की भूमिका संदिग्ध

​क्षेत्रवासियों ने हजरतगंज पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस अवैध गतिविधि के खिलाफ कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

​शिकायतकर्ताओं का आरोप है:

  • मिलीभगत की आशंका: पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी से स्पष्ट होता है कि कहीं न कहीं पुलिस और लॉन्ज संचालक के बीच सांठगांठ है।
  • रसूख का खेल: संचालक अपने राजनीतिक रसूख के बल पर कानून को चुनौती दे रहा है।
  • लापरवाही: संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद पुलिस की सक्रियता शून्य है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

​प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

​स्थानीय जनता अब सीधे जिला प्रशासन और लखनऊ पुलिस कमिश्नर से दखल की मांग कर रही है। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ‘मेराज लॉन्ज’ पर छापेमारी कर अवैध हुक्का बार को बंद नहीं कराया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

​सवाल यह उठता है कि जब मुख्यमंत्री कार्यालय के चंद कदमों की दूरी पर कानून का ऐसा उल्लंघन हो रहा है, तो आम जनता की सुरक्षा का दावा आखिर कितना पुख्ता है? अब देखना यह है कि क्या पुलिस-प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कोई कड़ी कार्रवाई करता है या फिर शिकायतों का दौर यूं ही चलता रहेगा।

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